मुकेश छाबड़ा ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ऐक्टिंग के बीच अंतर स्पष्ट किया.. साथ ही कहा....
कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएटर्स और ऐक्टिंग के बीच के अंतर पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाना और ऐक्टिंग दो अलग-अलग क्षेत्र हैं, जिन्हें आपस में मिश्रित नहीं किया जाना चाहिए। छाबड़ा का मानना है कि एक अभिनेता का सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और कौशल ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।

मुंबई: कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएटर्स और ऐक्टिंग के बीच के अंतर पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाना और ऐक्टिंग दो अलग-अलग क्षेत्र हैं, जिन्हें आपस में मिश्रित नहीं किया जाना चाहिए। छाबड़ा का मानना है कि एक अभिनेता का सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और कौशल ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
सोशल मीडिया और ऐक्टिंग: दो अलग क्षेत्र
मुकेश छाबड़ा ने इन्फ्लुएंसर्स और कास्टिंग के ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और ऐक्टिंग ये तीन अलग-अलग पेशे हैं, लेकिन अब लोग इन्हें आपस में मिला रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि फिल्म निर्माता जैसे राजू हिरानी, विशाल भारद्वाज या इम्तियाज अली अपने अभिनेता का चयन उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या के आधार पर करते हैं और यह मानते हैं कि वे ऐक्टिंग कर सकते हैं।"
प्रतिभा पर जोर
मुकेश छाबड़ा का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में सबसे अहम चीज अभिनेता की कला और उसकी ऐक्टिंग क्षमता है, न कि सोशल मीडिया पर उसकी लोकप्रियता। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माता हमेशा उस व्यक्ति को ही चुनते हैं जो भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त होता है और इस प्रक्रिया में अभिनेता की असली क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है, न कि सिर्फ उसके सोशल मीडिया फॉलोअर्स को देखकर।
मुकेश छाबड़ा का यह बयान इस बात को उजागर करता है कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता सिर्फ सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अभिनेता की कला और पेशेवर कौशल ही उसे एक बेहतरीन कलाकार बनाता है।
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