पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए 22 भारतीय मछुआरे, सरकार से बाकी की रिहाई की अपील
गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में मंगलवार को पाकिस्तान की कराची जेल से रिहा हुए 22 भारतीय मछुआरे पहुंचे। रिहाई के बाद मछुआरों ने सरकार को पाकिस्तान की जेलों में बंद अन्य भारतीय मछुआरों की जानकारी दी मछुआरों ने बताया कि पीकिस्तान की जेलों में भारत के 150 से 200 मछुआरों को वंदी बनाकर रखा गया है। मछुआरों नें उनके कैदी साथियों के जल्द से जल्द रिहाई की मांग की है।

पीटीआई: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में मंगलवार को पाकिस्तान की कराची जेल से रिहा हुए 22 भारतीय मछुआरे पहुंचे। रिहाई के बाद मछुआरों ने सरकार को पाकिस्तान की जेलों में बंद अन्य भारतीय मछुआरों की जानकारी दी मछुआरों ने बताया कि पीकिस्तान की जेलों में भारत के 150 से 200 मछुआरों को वंदी बनाकर रखा गया है। मछुआरों नें उनके कैदी साथियों के जल्द से जल्द रिहाई की मांग की है।
22 भारतीय मछुआरे लौटे घर, सरकार से रिहाई की अपील
पाकिस्तान की कराची जेल से मंगलवार को रिहा हुए 22 भारतीय मछुआरे गुजरात के गिर सोमनाथ पहुंचे। इन मछुआरों को पाकिस्तान की नौसैनिक सुरक्षा एजेंसी ने 2021 और 2022 के बीच अरब सागर में गुजरात की समुद्री सीमा के पास मछली पकड़ते समय गिरफ्तार कर लिया था। वेरावल के सहायक मत्स्य निदेशक वीके गोहेल ने बताया कि इस समय लगभग 195 भारतीय मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। रिहा हुए मछुआरों ने खुशी जताई और सरकार से अनुरोध किया कि पड़ोसी देश की जेलों में बंद अन्य मछुआरों की रिहाई में तेजी लाने का प्रयास किया जाए।
रिहा हुए मछुआरे कहां से हैं?
इन 22 मछुआरों में से 18 मछुआरे गुजरात के हैं, तीन मछुआरे दीव के हैं और एक मछुआरा उत्तर प्रदेश का है। गुजरात सरकार ने इनकी रिहाई के लिए केंद्र से अनुरोध किया था, और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल एवं कृषि मंत्री राघवजी पटेल ने केंद्र से इस संबंध में कदम उठाने की मांग की थी।
वाघा सीमा से वडोदरा पहुंचे मछुआरे
रिहा किए गए मछुआरों को कुछ दिन पहले वाघा सीमा पर भारतीय अधिकारियों के हवाले किया गया था, और सोमवार शाम को वे ट्रेन से वडोदरा पहुंचे। वडोदरा पहुंचने पर मछुआरों ने खुशी जाहिर की और अपने घर लौटने का आभार व्यक्त किया।
मछुआरों ने अपनी दुर्दशा का किया खुलासा
रिहा हुए मछुआरों में से एक ने वडोदरा में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हम बीमारियों से ग्रसित थे और खाने की समस्या का सामना कर रहे थे। हमारी स्थिति बहुत खराब थी।" उन्होंने अपनी दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि वे तीन साल पहले गुजरात तट पर मछली पकड़ने गए थे, लेकिन पाकिस्तानी समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने उन्हें पकड़ लिया और उन्हें जेल में डाल दिया।
एक अन्य मछुआरे ने कहा, "हम सभी 22 लोग बीमार हैं और बाकी कई लोग अभी भी पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे लिए जल्दी से जल्दी कदम उठाएं और हमें वहां की जेलों से मुक्त कराएं। वहां की जेलों में बहुत सारी समस्याएं हैं।"
पाकिस्तानी जेलों में बंद मछुआरों का पत्र
जो मछुआरे लौटे हैं, उनके पास एक पत्र है जिसे पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय मछुआरों ने लिखा है। इस पत्र में मछुआरों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और सरकार से उनका शीघ्र उद्धार करने का अनुरोध किया। पत्र में लिखा है, "हम यहां 150 मछुआरे हैं। दो साल पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने हमें रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन हम अभी भी कैद हैं। हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर हो रहा है, और हम मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।"
पत्र में यह भी कहा गया, "हम बीमार हैं, सांस लेने में कठिनाई और त्वचा रोगों का सामना कर रहे हैं, लेकिन केवल 22 मछुआरों को रिहा किया गया है। बाकी 150 मछुआरों के साथ अन्याय हो रहा है और हमारी स्थिति किसी को समझ में नहीं आ रही है।"
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पाकिस्तान की जेलों से रिहा हुए 22 भारतीय मछुआरों का यह कदम उनके लिए राहत का संदेश है, लेकिन जेलों में अभी भी सैकड़ों मछुआरे कैद हैं, जिनकी रिहाई के लिए भारत सरकार को और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। मछुआरों ने अपनी दुर्दशा का खुलासा किया है, और अब उनकी अपील है कि उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए। यह मामला भारतीय मछुआरों के लिए एक गंभीर मुद्दा बन गया है और दोनों देशों के बीच पारस्परिक सहयोग और समझदारी की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट करता है।
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