खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) का निलंबन हटाया, संजय सिंह को मिली कमान
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) का निलंबन अब समाप्त कर दिया गया है, जैसा कि मंगलवार को खेल मंत्रालय ने घोषणा की। यह निर्णय कुश्ती समुदाय के लिए राहत का कारण बन सकता है, खासकर उन एथलीटों के लिए जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी कर रहे थे। अब WFI को फिर से अपनी गतिविधियाँ संचालित करने की अनुमति दी गई है, और इसकी कमान संजय सिंह को सौंपी गई है।

नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) का निलंबन अब समाप्त कर दिया गया है, जैसा कि मंगलवार को खेल मंत्रालय ने घोषणा की। यह निर्णय कुश्ती समुदाय के लिए राहत का कारण बन सकता है, खासकर उन एथलीटों के लिए जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी कर रहे थे। अब WFI को फिर से अपनी गतिविधियाँ संचालित करने की अनुमति दी गई है, और इसकी कमान संजय सिंह को सौंपी गई है।
WFI पर लगाया गया निलंबन और फिर उसकी समाप्ति
यह निलंबन दिसंबर 2023 में खेल मंत्रालय द्वारा WFI के खिलाफ लगाए गए थे, जब भारतीय कुश्ती महासंघ ने अंडर 15 और अंडर 20 नेशनल चैंपियनशिप की घोषणा में जल्दबाजी दिखाई थी। इसके परिणामस्वरूप, मंत्रालय ने उस समय तत्काल कदम उठाते हुए WFI पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को कुश्ती से संबंधित मामलों की निगरानी के लिए एक तदर्थ समिति बनाने का आदेश दिया था।
खेल मंत्रालय ने हाल ही में एक पत्र जारी किया, जिसमें बताया गया कि भारतीय कुश्ती महासंघ पर लगाया गया बैन हटा लिया गया है और इसे राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में फिर से स्थापित किया गया है। इसका मतलब है कि WFI अब घरेलू टूर्नामेंटों का आयोजन कर सकेगा और राष्ट्रीय टीम के चयन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों का चयन कर सकता है।
संजय सिंह को मिली WFI की कमान
24 दिसंबर 2023 को WFI के चुनाव में संजय सिंह के पैनल ने जीत हासिल की थी, लेकिन कुश्ती महासंघ पर बैन लगने के कारण उनका नेतृत्व प्रभावी नहीं हो सका। संजय सिंह को WFI के अध्यक्ष के रूप में पूरे नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है। इस निर्णय से यह संकेत मिलता है कि सरकार ने अब इस संगठन के मामलों में और नियंत्रण की स्थिति बनाने का फैसला लिया है, विशेष रूप से बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ी विवादित स्थिति के बाद।
बृजभूषण शरण सिंह, जो कि भाजपा सांसद हैं और महिला एथलीटों के यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं, के करीबी सहयोगी होने के कारण संजय सिंह को इस समय सरकार द्वारा WFI की कमान सौंपी गई है।
खेल मंत्रालय द्वारा WFI को दिए गए निर्देश
खेल मंत्रालय ने WFI से यह सुनिश्चित करने को कहा कि निलंबन के दौरान किए गए सभी संशोधन वापस लिए जाएं। मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया कि नए पदाधिकारियों के बीच सत्ता का उचित उपयोग किया जाए और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता, जांच और संतुलन सुनिश्चित किया जाए। मंत्रालय ने 4 हफ्ते के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा करने की समयसीमा तय की है।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों को पदाधिकारी के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है या जिन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, उन्हें संघ और उसकी संबद्ध इकाइयों से पूरी तरह से अलग रखा जाएगा।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता
WFI को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए खिलाड़ियों का चयन एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाए। यह प्रक्रिया खेल संहिता और UWW द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार होनी चाहिए। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अगर इस प्रक्रिया में कोई भी उल्लंघन हुआ, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें खेल संहिता के तहत कार्रवाई भी शामिल होगी।
WFI पर से निलंबन हटाए जाने और संजय सिंह को कमान सौंपे जाने के बाद, भारतीय कुश्ती महासंघ को नए सिरे से अपनी कार्यप्रणाली को सुधारने और कुश्ती के क्षेत्र में विश्वास बहाल करने का अवसर मिला है। मंत्रालय की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि भारतीय कुश्ती संगठन अब अपने पुराने विवादों से बाहर निकलकर खेल को आगे बढ़ाने में सक्षम होगा।
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