IIM LUCKNOW: ग्राहकों का विश्वास हासिल करने के लिए चैटबॉट्स द्वारा किस प्रकार की माफ़ी मांगना सर्वोत्तम है? IIM लखनऊ कराता है अध्ययन

आईआईएम लखनऊ (Indian Institute of Management Lucknow) के एक अध्ययन में यह पता चला है कि ऑनलाइन यात्रा एजेंसियों (OTA) के चैटबोट्स द्वारा सेवा विफलताओं के लिए दी गई माफी में भाषा का चयन ग्राहक की स्वीकृति और माफी को प्रभावित करता है। अध्ययन में यह पाया गया कि "कॉनक्रीट भाषा" (concrete language) का उपयोग बड़े मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए, जबकि "एब्सट्रैक्ट भाषा" (abstract language) का प्रयोग छोटे मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए।

Feb 9, 2025 - 17:13
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IIM LUCKNOW: ग्राहकों का विश्वास हासिल करने के लिए चैटबॉट्स द्वारा किस प्रकार की माफ़ी मांगना सर्वोत्तम है? IIM लखनऊ कराता है अध्ययन

आईआईएम, लखनऊ: आईआईएम लखनऊ (Indian Institute of Management Lucknow) के एक अध्ययन में यह पता चला है कि ऑनलाइन यात्रा एजेंसियों (OTA) के चैटबोट्स द्वारा सेवा विफलताओं के लिए दी गई माफी में भाषा का चयन ग्राहक की स्वीकृति और माफी को प्रभावित करता है। अध्ययन में यह पाया गया कि "कॉनक्रीट भाषा" (concrete language) का उपयोग बड़े मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए, जबकि "एब्सट्रैक्ट भाषा" (abstract language) का प्रयोग छोटे मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए।

इस अध्ययन को एशिया पैसिफिक जर्नल ऑफ टूरिज्म रिसर्च (Asia Pacific Journal of Tourism Research) में प्रकाशित किया गया है। इसे आईआईएम लखनऊ की प्रोफेसर Payal Mehra और शोधकर्ता Rishab Chauhan ने मिलकर किया है।

माफी की भाषा का ग्राहक स्वीकार्यता पर प्रभाव
यह अध्ययन यह विश्लेषण करता है कि माफी के लिए उपयोग की गई भाषा ग्राहक की स्वीकृति और क्षमा पर कैसे प्रभाव डालती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जब कोई बड़ी सेवा विफलता होती है, तो कॉनक्रीट भाषा का उपयोग करना अधिक प्रभावी होता है, क्योंकि यह अधिक विशिष्ट और भरोसेमंद होती है। इसके विपरीत, छोटे मुद्दों के लिए एब्सट्रैक्ट भाषा का उपयोग करना ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह भाषा कम चिंताजनक और कम दबावपूर्ण होती है।

कोनक्रीट और एब्सट्रैक्ट भाषा में अंतर
कॉनक्रीट भाषा और एब्सट्रैक्ट भाषा के बीच का अंतर अध्ययन में इस तरह से समझाया गया है:

कॉनक्रीट माफी: "हम आपके बुकिंग प्रोसेसिंग में देरी के लिए माफी चाहते हैं। आपकी USD 100 की रिफंड 3 व्यापारिक दिनों में क्रेडिट कर दी जाएगी।"
एब्सट्रैक्ट माफी: "हम देरी के लिए माफी चाहते हैं। आपकी रिफंड जल्द ही क्रेडिट कर दी जाएगी।"
जहां कॉनक्रीट माफी में सटीक जानकारी और समाधान दिया जाता है, वहीं एब्सट्रैक्ट माफी में केवल सामान्य शब्दों का उपयोग किया जाता है।

अध्ययन का उद्देश्य और महत्व
इस अध्ययन का उद्देश्य यह था कि कैसे भाषा के विभिन्न रूप ग्राहक के मनोविज्ञान और उनकी संतुष्टि को प्रभावित करते हैं। चैटबोट्स और ऑनलाइन सर्विसेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता हुआ प्रयोग इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है। अगर कंपनियाँ यह समझें कि किस स्थिति में किस प्रकार की भाषा का उपयोग करना चाहिए, तो वे अपनी सेवा में सुधार कर सकती हैं और ग्राहक की संतुष्टि बढ़ा सकती हैं।

अध्ययन के परिणाम
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब बड़े मुद्दों की बात आती है, जैसे कि बुकिंग में देरी या रिफंड प्रक्रिया में कोई समस्या, तो कॉनक्रीट माफी ग्राहकों को यह विश्वास दिलाती है कि कंपनी उनके मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और उसका समाधान जल्द ही होगा। वहीं, छोटे मुद्दों के लिए, जैसे कि मामूली विलंब या कम महत्व के तकनीकी समस्याओं के लिए एब्सट्रैक्ट माफी का उपयोग अधिक उपयुक्त होता है, क्योंकि इससे ग्राहक को हल्का अनुभव होता है।

ग्राहक अनुभव और माफी की भूमिका
कंपनियों को यह समझने की जरूरत है कि माफी का तरीका ग्राहक अनुभव को सीधे प्रभावित करता है। सही माफी, समय पर माफी और सही भाषा के साथ, कंपनी और ग्राहक के बीच सकारात्मक संबंध बनाए रख सकती है। एक उपयुक्त माफी से न केवल ग्राहक का अनुभव बेहतर हो सकता है, बल्कि कंपनी की छवि भी सुधार सकती है।

इस अध्ययन के परिणाम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श मार्गदर्शन के रूप में कार्य कर सकते हैं, विशेषकर उन कंपनियों के लिए जो AI और चैटबोट्स के माध्यम से अपने ग्राहकों से संवाद करती हैं।

आईआईएम लखनऊ का यह अध्ययन यह साबित करता है कि सेवा विफलताओं के लिए माफी के दौरान उपयोग की जाने वाली भाषा का चयन ग्राहक की स्वीकृति और अनुभव को प्रभावित करता है। कॉनक्रीट भाषा बड़ी समस्याओं के लिए उपयुक्त होती है, जबकि एब्सट्रैक्ट भाषा छोटे मुद्दों के लिए अधिक प्रभावी होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनियों को अपनी माफी की शैली को ग्राहक की जरूरतों और समस्या के आकार के अनुसार अनुकूलित करना चाहिए, ताकि ग्राहक का अनुभव बेहतर और संतोषजनक हो सके।

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Prashant Singh Journalism Student University Of Lucknow.