हरियाणा, 21 जनवरी: गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा की शादी की खबर ने हरियाणा के लड़सौली गांव में सभी को चौंका दिया है। हाल ही में, नीरज ने अपनी प्रेमिका हिमानी मोर से शादी किया है, और इस विवाह को लेकर कई दिलचस्प जानकारी सामने आ रही हैं। सोमवार को हिमानी के पिता, चांदराम मोर ने इस विवाह से जुड़ी कुछ अहम बातें साझा की, जो इस विवाह को विशेष बनाती हैं।
दोनों परिवार पहले से थे परिचित
चांदराम मोर ने बताया कि दोनों परिवार एक-दूसरे से पहले से परिचित थे और एक-दूसरे के खुशी और ग़म में शामिल होते रहते थे। यह रिश्ता दोनों परिवारों की सहमति से वैवाहिक गांठ के रूप में परिवर्तित हुआ। शादी की सभी रस्में हरियाणवी परंपराओं के अनुसार आयोजित की गईं। विशेष रूप से, शादी में दूल्हे और दुल्हन, साथ ही मेहमानों ने भी हरियाणवी समाज के कपड़े पहने।
देसी खाने और स्वागत की परंपरा
18 जनवरी को नीरज चोपड़ा के लड़सौली गांव पहुंचने पर उनका स्वागत देसी व्यंजनों से किया गया। हालांकि, नीरज सिर्फ दो घंटे ही गांव में रुके, लेकिन उस समय में उन्होंने देसी भोजन का पूरा आनंद लिया। उन्हें मिक्स वेज, पनीर की सब्जी, घर की दही, रोटी और उनकी पसंदीदा हरी चटनी तैयार की गई। भोजन के बाद, नीरज ने घर की बनी हुई खीर भी खाई। यह स्वागत पूरी तरह से पारंपरिक था और दर्शाता है कि दोनों परिवारों ने हरियाणवी संस्कृति को पूरी तरह से अपनाया है।
दहेज के खिलाफ संदेश
चांदराम मोर ने इस शादी का एक खास पहलू भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों ने यह प्रण लिया था कि वे समाज में यह संदेश देंगे कि रिश्ते पैसों या दहेज पर आधारित नहीं होने चाहिए। शादी में किसी प्रकार का दहेज नहीं लिया गया और यह संदेश देने की कोशिश की गई कि रिश्ते केवल प्रेम और समझदारी पर आधारित होते हैं। चांदराम मोर का यह कहना था कि पैसे के लेन-देन से रिश्ते नहीं निभाए जाते हैं और यह विवाह एक उदाहरण पेश करने का अवसर है।
हिमानी की मां का आशीर्वाद
हिमानी की मां, मीना मोर ने भी अपनी बेटी की शादी को लेकर कुछ बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा से अपनी बेटी के लिए एक अच्छे वर की कामना करती थीं, और भगवान की कृपा से उनकी बेटी की शादी देश के गौरव नीरज चोपड़ा के साथ हुई। उन्होंने यह भी बताया कि शादी के लिए बहुत कम समय था, क्योंकि हिमानी के पास छुट्टियां कम थीं और नीरज का प्रशिक्षण शेड्यूल भी बहुत व्यस्त था।
क्रीड़ा में हिमानी की प्रेरणा
मीना मोर ने इस दौरान यह भी बताया कि वह कबड्डी की कोच रह चुकी हैं और उन्होंने ही हिमानी को टेनिस खेलना शुरू करने के लिए प्रेरित किया। मीना के साथ-साथ हिमानी के मामा, सुरेश राणा ने भी टेनिस की शुरुआत में उनकी मदद की। हिमानी की खेल में भी अच्छे परिणाम रहे हैं, और उनका यह खेल के प्रति समर्पण उनके परिवार की खेलों के प्रति रुचि को दर्शाता है।
डेस्टिनेशन वेडिंग का फैसला
चांदराम मोर ने बताया कि पिछले साल नवंबर में वह रिटायर हो गए थे, और तब दोनों परिवारों ने निर्णय लिया कि शादी को डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में किया जाए। इसमें केवल करीबी रिश्तेदार और विशेष लोग ही शामिल हुए। शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था और इस आयोजन में बाहरी लोगों को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, बाद में दोनों परिवारों ने यह तय किया कि वे एक रिसेप्शन पार्टी आयोजित करेंगे, जिसमें सोनीपत में गांववालों और रिश्तेदारों को आमंत्रित किया जाएगा।
लिटिल एंजल्स स्कूल में मिठाई वितरण
हिमानी की मां, मीना मोर सोनीपत के लिटिल एंजल्स स्कूल में शिक्षिका हैं। जब उन्होंने स्कूल में पहुंचकर अपनी बेटी की शादी की खुशी साझा की, तो साथी शिक्षिकाओं ने उन्हें बधाई दी। इस अवसर पर, मीना मोर ने सभी शिक्षिकाओं को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया।
यह शादी न केवल पारंपरिक हरियाणवी रीति-रिवाजों के साथ हुई, बल्कि यह समाज में दहेज जैसी बुराइयों को समाप्त करने का एक बड़ा संदेश भी देती है। नीरज चोपड़ा और हिमानी की शादी इस तरह से एक मिसाल बन गई है, जो समाज में सच्चे रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देती है।