इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश: शराब दुकानों का आवंटन लाटरी से, निर्णय न्यायालय के अधीन
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लाटरी के माध्यम से शराब की दुकानों के आवंटन से संबंधित एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। इस आदेश के तहत, आवंटन प्रक्रिया को न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया है। इसके अलावा, राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल 2025 को होगी।

लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लाटरी के माध्यम से शराब की दुकानों के आवंटन से संबंधित एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। इस आदेश के तहत, आवंटन प्रक्रिया को न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया है। इसके अलावा, राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल 2025 को होगी।
आदेश का संदर्भ
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने सीतापुर के रामचन्द्र व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। याचियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा छह फरवरी 2025 को जारी किए गए शासनादेश को चुनौती दी थी, जिसमें शराब की दुकानों का आवंटन लाटरी के माध्यम से किए जाने का निर्देश दिया गया था। याचिकाओं में यह कहा गया कि लाटरी प्रणाली से शराब की दुकानों का आवंटन राज्य सरकार के नियमों के खिलाफ है।
याचिकाओं की दलील
याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया कि शराब दुकानों का लाटरी द्वारा आवंटन शासनादेश के तहत किए गए संशोधन के बावजूद उचित नहीं है। उनका कहना था कि राज्य सरकार ने तीन मार्च 2025 को नियमावली में संशोधन किया था, लेकिन इस संशोधन के बाद भी छह फरवरी 2025 का शासनादेश औचित्यपूर्ण नहीं है। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया कि लाटरी प्रक्रिया नियम पांच के विपरीत है, जो पहले से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शराब के दुकानों के आवंटन के लिए है।
राज्य सरकार का विरोध
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता एलपी मिश्रा ने अपनी दलीलें पेश की। उन्होंने कहा कि इसी विषय पर पहले से इलाहाबाद हाई कोर्ट में एकल पीठ के समक्ष याचिकाएं विचाराधीन हैं, और ऐसे में वर्तमान याचिका को भी एकल पीठ द्वारा ही सुना जाना चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने इस आपत्ति को नकारते हुए रिपोर्ट मंगाई और याचिका को खंडपीठ द्वारा सुनने योग्य करार दिया।
एकल पीठ का फैसला
यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ के समक्ष भी पहले सुनवाई के लिए आया था। एकल पीठ ने इस मामले पर विचार करते हुए शराब के व्यवसाय को सांविधानिक अधिकार न मानते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने कहा कि शराब का व्यापार किसी व्यक्ति का मौलिक अधिकार नहीं है, और इस प्रकार की याचिकाओं को खारिज किया गया।
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न्यायालय का आदेश और आगे की कार्रवाई
लखनऊ खंडपीठ के आदेश के अनुसार, राज्य सरकार को मामले में चार सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में निर्णय न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। अगले सुनवाई की तारीख सात अप्रैल 2025 निर्धारित की गई है।
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