डिप्रेशन से बढ़ता है पुरानी बीमारियों का खतरा, हो सकती है यह समस्या...
एक नए अध्ययन में पता चला है कि डिप्रेशन से पीड़ित अडल्टस् में ऑस्टियोआर्थराइटिस (हड्डियों की बीमारी) और हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) जैसी पुरानी बीमारियों के विकसित होने की संभावना 30% अधिक होती है। यह अध्ययन यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डिप्रेशन के इलाज में मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य को प्रबंधित करने के तरीकों को शामिल किया जाना चाहिए।

डिप्रेशन का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
डिप्रेशन, जो लगातार मनोदशा में गिरावट की स्थिति है, को पहले से ही हृदय रोग और मधुमेह के खतरे को बढ़ाने वाला माना जाता है। हालांकि, इस नए अध्ययन में पहली बार डिप्रेशन और कई पुरानी बीमारियों के बीच संबंध को व्यापक रूप से देखा गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में ऑस्टियोआर्थराइटिस और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां तेजी से विकसित होती हैं।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
- डिप्रेशन से पीड़ित लोगों में पुरानी बीमारियों का खतरा 30% अधिक होता है।
- डिप्रेशन का शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
- डिप्रेशन के इलाज में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
शोधकर्ताओं की सलाह
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता और यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रतिनिधि ने कहा कि डिप्रेशन के इलाज में केवल मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को मरीजों के शारीरिक स्वास्थ्य की भी नियमित जांच करनी चाहिए और उन्हें पुरानी बीमारियों से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
पहले के अध्ययनों से तुलना
पिछले अध्ययनों में डिप्रेशन से पीड़ित मरीजों में केवल कुछ विशेष बीमारियों के खतरे को देखा गया था। लेकिन इस नए अध्ययन में व्यापक रूप से कई पुरानी बीमारियों के जोखिम का विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं ने डिप्रेशन के शारीरिक प्रभावों को समझने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा का अध्ययन किया।
आगे की राह
शोधकर्ताओं का मानना है कि डिप्रेशन के इलाज में एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा देने वालों से आग्रह किया कि वे डिप्रेशन से पीड़ित मरीजों की नियमित जांच करें और उन्हें पुरानी बीमारियों से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
यह अध्ययन एक बार फिर इस बात की पुष्टि करता है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों का समय पर इलाज करके न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि पुरानी बीमारियों के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
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