संभल में सीओ के बयान पर सपा और भाजपा के बीच तीखी सियासी जंग, होली और जुमे को लेकर बढ़ी विवाद की गर्मी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस अधीक्षक (सीओ) अनुज चौधरी के होली और जुमे को लेकर दिए गए बयान ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इस विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के बीच तीखी नोंक-झोंक हो रही है। एक दिन पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे, तो वहीं पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने सीओ जैसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात की थी। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस बयान पर तीखा हमला किया है।

Mar 9, 2025 - 12:12
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संभल में सीओ के बयान पर सपा और भाजपा के बीच तीखी सियासी जंग, होली और जुमे को लेकर बढ़ी विवाद की गर्मी
सीओ अनुज चौधरी के होली पर दिए बयान सियासी गर्मी बढ़ी

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस अधीक्षक (सीओ) अनुज चौधरी के होली और जुमे को लेकर दिए गए बयान ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इस विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के बीच तीखी नोंक-झोंक हो रही है। एक दिन पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे, तो वहीं पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने सीओ जैसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात की थी। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस बयान पर तीखा हमला किया है।

सीओ अनुज चौधरी का बयान: होली और जुमे पर विवाद
संभल जिले में एक शांति समिति की बैठक के दौरान सीओ अनुज चौधरी ने कहा था, “होली के दिन सिर्फ वही लोग बाहर निकलें, जिन्हें रंग से कोई आपत्ति न हो। होली साल में एक बार आती है, जबकि जुमे 52 होते हैं।” उनके इस बयान ने विवाद को जन्म दिया, जिसे लेकर सपा और भाजपा दोनों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।

सीओ के बयान का संदर्भ देते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था, “जिन अधिकारियों को होली और ईद के गले मिलने में एकरूपता देखनी चाहिए, अगर वही नकारात्मक बात करेंगे तो भेदकारी भाजपा के राज में सौहार्द की रक्षा कैसे होगी?” वहीं, प्रो. रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि संभल में हिंसा को सीओ ने ही भड़काया था और यह सुनिश्चित किया कि जब सपा की सरकार आएगी, तो ऐसे अधिकारियों को जेल में डाला जाएगा।

भा.ज.पा. का पलटवार: केशव प्रसाद मौर्य और विजयलक्ष्मी गौतम की प्रतिक्रियाएं
इस विवाद को लेकर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “अगर कोई सही बात कहता है तो सपा को मिर्ची लगती है। अखिलेश यादव को ईद मिलन करना चाहिए, हम होली मिलन करेंगे। 2027 की बात छोड़िए, 2047 तक सपा की सत्ता आने का कोई अवसर नहीं है।”

साथ ही, राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने आरोप लगाया कि सपा हिंदुओं का विरोध कर रही है और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा का रुख हमेशा से तुष्टिकरण का रहा है, जो देश की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के खिलाफ है।

एएमयू में होली मिलन समारोह पर सपा-भा.ज.पा. के बीच तकरार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में होली मिलन समारोह को लेकर भी सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव को ईद मिलन समारोह करना चाहिए, और भाजपा होली मिलन समारोह मनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक सपा को सत्ता में आने का कोई अवसर नहीं है, जब तक वे ऐसे विवादास्पद मुद्दों पर राजनीति करते रहेंगे।

दारुल उलूम की अपील: रमजान और होली का संगम
इस साल रमजान का दूसरा जुमा और होली एक साथ, यानी 14 मार्च को पड़ रहे हैं। इसे लेकर दारुल उलूम ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे करीबी मस्जिदों में ही नमाज अदा करें और रंग खेलने वाले स्थानों से दूर रहें। दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग अपने मुहल्ले की या करीबी मस्जिदों में ही नमाज अदा करने जाएं। उन्होंने कहा कि दूरदराज की मस्जिदों में जाने से बचना चाहिए और ऐसे स्थानों से भी दूर रहना चाहिए, जहां होली खेली जा रही हो।

मौलाना मद्रासी ने यह भी बताया कि जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तब दारुल उलूम ऐसी अपीलें जारी करता है ताकि देश में शांति और सौहार्द बना रहे। कोरोना काल में भी इस तरह की अपील की गई थी, और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे।

संभल में सीओ के बयान ने एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर सपा इस मुद्दे को सांप्रदायिक सौहार्द की रक्षा से जोड़ रही है, वहीं भाजपा इसे सपा के तुष्टिकरण और हिंदू विरोधी राजनीति के रूप में देख रही है। दारुल उलूम की अपील से यह संदेश दिया गया है कि धार्मिक विविधता और शांति बनाए रखने के लिए सावधानी बरतनी जरूरी है। अब यह देखना होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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Prashant Singh Journalism Student University Of Lucknow.