सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल अधिनियम-1991 की वैधता पर नई याचिका को लेकर कड़ी नाराजगी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूजा स्थल अधिनियम-1991 की वैधता को लेकर दाखिल नई याचिकाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यह संकेत दिया कि वे इस मामले पर तत्काल सुनवाई नहीं करेंगे।

Feb 17, 2025 - 16:25
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सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल अधिनियम-1991 की वैधता पर नई याचिका को लेकर कड़ी नाराजगी जताई
असिदुद्दीन ओवैसी और सपा सांसद इक्रा हसन
पीटाआई: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूजा स्थल अधिनियम-1991 की वैधता को लेकर दाखिल नई याचिकाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यह संकेत दिया कि वे इस मामले पर तत्काल सुनवाई नहीं करेंगे। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आज दो न्यायाधीशों की पीठ बैठी है और पहले इस मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ कर चुकी है। इसलिए इन याचिकाओं पर सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह तक टाल दी गई है।

याचिका दाखिल करने की सीमा पर कोर्ट का बयान
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने एक नई याचिका का जिक्र किया, जिसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाएं दायर करने की एक सीमा होती है। सीजेआई ने कहा कि इतने सारे अंतरिम आवेदन दायर किए गए हैं कि कोर्ट शायद इस पर सुनवाई नहीं कर पाएगा।

पहले से लंबित याचिकाएं और अदालत का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2024 को हिंदू पक्षों की 18 याचिकाओं पर कार्यवाही करने पर रोक लगा दी थी। इन याचिकाओं में ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद, और संभल के शाही जामा मस्जिद समेत 10 मस्जिदों के सर्वेक्षण की मांग की गई थी। इसके बाद, अदालत ने इन याचिकाओं को 17 फरवरी 2025 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
ओवैसी और इकरा हसन की नई याचिकाएं
12 दिसंबर के बाद असदुद्दीन ओवैसी, सपा सांसद इकरा हसन और कांग्रेस ने भी नई याचिकाएं दाखिल कीं। इन याचिकाओं में देशभर में पूजा स्थल अधिनियम-1991 को पूरी तरह से लागू करने की मांग की गई थी। ओवैसी की याचिका पहले ही कोर्ट में सुनी जा चुकी है, वहीं इकरा हसन ने 14 फरवरी को मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाकर कानूनी कार्रवाई की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे देश में सांप्रदायिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को खतरा हो सकता है।

हिंदू संगठनों द्वारा याचिका दाखिल करना
अखिल भारतीय संत समिति ने भी पूजा स्थल अधिनियम-1991 को लेकर एक याचिका दाखिल की है। इस मामले में वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी अपनी याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम की धारा 2, 3 और 4 को चुनौती दी है और इन धाराओं को अलग करने की मांग की है।

क्या है पूजा स्थल अधिनियम-1991?
पूजा स्थल अधिनियम-1991 का उद्देश्य धार्मिक स्थलों के स्वरूप में किसी प्रकार के बदलाव को रोकना है। यह कानून 15 अगस्त 1947 को जिन धार्मिक स्थलों का रूप था, उसे उसी रूप में बनाए रखने का आदेश देता है। इसके तहत किसी भी धार्मिक स्थल का स्वरूप बदला नहीं जा सकता, हालांकि राम जन्मभूमि मामले को इससे अलग रखा गया था।


सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल अधिनियम-1991 की वैधता पर नई याचिकाओं को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है और कहा कि इस पर सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह तक टाली गई है। यह मामला अब और जटिल हो सकता है, क्योंकि इस पर कई पक्षों की याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय दोनों के प्रतिनिधियों द्वारा दायर किए गए आवेदन शामिल हैं। अब अदालत को इस मुद्दे पर व्यापक और संतुलित फैसला लेने की आवश्यकता होगी।

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Prashant Singh Journalism Student University Of Lucknow.