महाकुंभ में नाविक परिवार की 30 करोड़ कमाई पर सपा और निषाद पार्टी में बयानबाजी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने विधानसभा में यह दावा किया था कि एक नाविक परिवार ने प्रयागराज महाकुंभ में 130 नावों के जरिए 30 करोड़ रुपये की कमाई की। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने इस कमाई पर सवाल उठाए हैं और इसकी सच्चाई की जांच की मांग की है। समाजवादी पार्टी  के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सत्ता संरक्षण में श्रद्धालुओं की लूट करार दिया, जबकि निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मत्स्य मंत्री डा. संजय निषाद ने इस पर तीखा पलटवार किया।

Mar 8, 2025 - 11:00
Mar 8, 2025 - 11:03
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महाकुंभ में नाविक परिवार की 30 करोड़ कमाई पर सपा और निषाद पार्टी में बयानबाजी
सपा और निसाद पार्टी के बीच तनातनी
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने विधानसभा में यह दावा किया था कि एक नाविक परिवार ने प्रयागराज महाकुंभ में 130 नावों के जरिए 30 करोड़ रुपये की कमाई की। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने इस कमाई पर सवाल उठाए हैं और इसकी सच्चाई की जांच की मांग की है। समाजवादी पार्टी  के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे सत्ता संरक्षण में श्रद्धालुओं की लूट करार दिया, जबकि निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मत्स्य मंत्री डा. संजय निषाद ने इस पर तीखा पलटवार किया।

सत्ता संरक्षण में श्रद्धालुओं से लूट
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि नाविक पिंटू महरा का आपराधिक इतिहास है और इस कमाई के पीछे सत्ता का संरक्षण है। अखिलेश ने सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें पिंटू महरा का आपराधिक रिकार्ड बताया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि 30 करोड़ रुपये की कमाई कैसे हुई और क्या इस पर जीएसटी चुकाई गई?
अखिलेश ने इसे लूट की कहानी बताया और मुख्यमंत्री से इसकी सच्चाई की जांच की मांग की। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या महाकुंभ की कमाई के बारे में सरकार ने सही आंकड़े पेश किए हैं, क्योंकि प्रदेश पर भारी कर्ज चढ़ चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की सरकार ने जनता के गले में कर्ज का "नौलखा हार" डाल दिया है।

निषाद पार्टी का पलटवार: श्रद्धा से कमाई को अपमानित करना गलत
इस बयानबाजी के बाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मत्स्य मंत्री डा. संजय निषाद ने सपा अध्यक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नाविकों को श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और सौभाग्य प्राप्त करने के लिए पैसे दिए हैं, और इस कमाई को लूट की संज्ञा देना निषाद समाज का अपमान है।
संजय निषाद ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को काली कमाई दिखती है, लेकिन उन्होंने अपने शासनकाल में काली कमाई करने वालों के बारे में कभी बात नहीं की। उन्होंने अखिलेश पर यह आरोप लगाया कि उनके शासन में कई लोग काली कमाई करते रहे, लेकिन उस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का सवाल: क्या जीएसटी चुकाई गई?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस मामले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इस कथित 30 करोड़ रुपये की कमाई पर जीएसटी चुकाई गई या नहीं। उनका कहना था कि इस विवरण से यह लगता है कि श्रद्धालुओं को ठगा गया है। उनका आरोप था कि सत्ता में बैठे लोग केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की कहानियां गढ़ रहे हैं, जबकि असली मुद्दे से ध्यान हटा रहे हैं।

सपा की आलोचना और निषाद समाज का समर्थन
अखिलेश यादव द्वारा की गई आलोचना के बाद निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद ने सीधे तौर पर सपा की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सपा का पिछला चुनाव बहुत खराब रहा था और अब अगला चुनाव भी सपा के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। संजय निषाद ने निषाद समाज को अपने पक्ष में खड़ा करने का प्रयास किया और कहा कि उनकी पार्टी नाविकों और अन्य पिछड़े वर्गों के हक के लिए काम कर रही है।

सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट: पिछड़ों को लाभ का मुद्दा
संजय निषाद ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें सामाजिक न्याय समिति ने यह कहा था कि पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण का सबसे अधिक लाभ मिल्कमैन (यादव बिरादरी) ने लिया। यह रिपोर्ट सपा की नीतियों पर सवाल उठाने का प्रयास कर रही थी, जिसमें पिछड़ी जातियों के लिए किए गए आरक्षण के लाभों पर विचार किया गया।

महाकुंभ में नाविक परिवार द्वारा कमाई गई 30 करोड़ रुपये की कहानी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक नया मोड़ दिया है। सपा और निषाद पार्टी के बीच तीखी बयानबाजी और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने इस मामले को और भी जटिल बना दिया है। जहां एक ओर अखिलेश यादव इसे सत्ता के संरक्षण में लूट करार दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संजय निषाद ने इसे निषाद समाज का अपमान बताया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले की जांच होती है या यह एक राजनीतिक हथियार के रूप में ही उपयोग होता रहेगा।

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Prashant Singh Journalism Student University Of Lucknow.