पीटीआई, नई दिल्ली: भारत की शीर्ष अदालत, सुप्रीम कोर्ट, ने शुक्रवार को ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों और कैसीनो को एक बड़ी राहत देते हुए कर चोरी के आरोप में जारी किए गए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की यह रोक, इन कंपनियों को जीएसटी विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिसों के खिलाफ बड़ी राहत प्रदान करती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग फर्मों द्वारा चुनौती दिए गए 28 प्रतिशत जीएसटी को लेकर पहले से जारी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन शामिल थे, जिन्होंने मामले की सुनवाई की। इस दौरान, अदालत ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर लगाए गए कारण बताओ नोटिसों पर रोक लगा दी और इस मामले में उच्च न्यायालयों द्वारा दी गई राहत पर भी रुकावट लगाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2023 में जारी किए गए नोटिसों पर फिलहाल किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
जीएसटी कानून में संशोधन और इसके प्रभाव
केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2023 को जीएसटी कानून में संशोधन किया था, जिसके तहत विदेशी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। इस संशोधन के बाद, जीएसटी विभाग ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें उन पर कर चोरी का आरोप लगाया गया था। यह नोटिस उस समय जारी किए गए थे जब गेमिंग कंपनियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया था।
28 प्रतिशत जीएसटी का विरोध, गेमिंग कंपनियों की याचिका
अगस्त 2023 में जीएसटी परिषद ने एक बड़ा फैसला लिया था, जिसमें यह कहा गया था कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जितने रुपये का दांव लगाया जाएगा, उस पूरी रकम पर 28 प्रतिशत जीएसटी लिया जाएगा। इसके बाद, गेमिंग कंपनियों ने इस निर्णय के खिलाफ विभिन्न
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इन याचिकाओं में गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी को अनुचित बताया था।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई और आदेश
इस विवाद के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, और बाद में शीर्ष अदालत ने उन सभी याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर कर लिया, जो विभिन्न हाईकोर्टों में चल रही थीं। शुक्रवार को इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, और अदालत ने जीएसटी विभाग द्वारा की गई सभी कार्यवाहियों पर रोक लगाने का आदेश दिया।
अदालत में जीएसटी विभाग का पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में जीएसटी विभाग का पक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि कुछ कारण बताओ नोटिस फरवरी 2024 में समाप्त हो जाएंगे। हालांकि, अदालत ने कहा कि इन मामलों में सुनवाई की आवश्यकता है और गेमिंग कंपनियों के खिलाफ सभी कार्यवाही पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
2023 में कर चोरी का आरोप और नोटिस
2023 में जीएसटी खुफिया महानिदेशालय ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को 71 नोटिस भेजे थे। इन नोटिसों में कंपनियों पर 2022-23 के दौरान और 2023-24 के पहले सात महीनों में 1.12 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी चोरी का आरोप लगाया गया था। इन नोटिसों में ब्याज और
दंड को छोड़कर कुल कर चोरी का अनुमान था, जो एक बड़ी रकम थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को बड़ी राहत दी है, क्योंकि उन्हें कर चोरी के आरोपों के खिलाफ अगले कुछ महीनों तक राहत मिली है। इस मामले में अब तक की सुनवाई और निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और जीएसटी विभाग के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे इस मुद्दे को सही तरीके से हल करें, ताकि गेमिंग कंपनियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही उचित और निष्पक्ष हो।