संसद का बजट सत्र: विपक्ष का मणिपुर मुद्दे पर हंगामा, ओवैसी ने ताजमहल पर उठाए सवाल
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही में विपक्षी दलों द्वारा हंगामा किया गया। संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने मणिपुर हिंसा और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही, राज्यसभा में भी विपक्षी नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर हंगामा किया, जिससे संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई।

विपक्ष के उठाए गए प्रमुख मुद्दे
विपक्षी सांसदों ने संसद में कुछ प्रमुख मुद्दों को उठाने का संकेत दिया है। इनमें मतदाता सूची में कथित हेराफेरी, मणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाएं, और ट्रंप प्रशासन से भारत के रिश्ते जैसे मुद्दे शामिल हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है और उनके समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है।
सरकार का ध्यान बजट प्रक्रिया और महत्वपूर्ण विधेयकों पर
सरकार का मुख्य ध्यान अब संसद में अनुदान मांगों की मंजूरी प्राप्त करने, बजटीय प्रक्रिया को पूरा करने, मणिपुर बजट के लिए अनुमोदन प्राप्त करने और वक्फ संशोधन विधेयक को पारित करने पर रहेगा। सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ये मुद्दे संसद के इस सत्र में सबसे महत्वपूर्ण हैं, और इन्हें जल्द से जल्द हल किया जाएगा।
ओवैसी का ताजमहल पर बयान: 'पानी का रिसाव, दरारें आ रही हैं'
लोकसभा में असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय पुरातत्व विभाग में खाली पड़े पदों पर सवाल उठाए और ताजमहल की स्थिति पर चिंता जताई। ओवैसी ने कहा कि ताजमहल में पानी का रिसाव हो रहा है और इसकी दीवारों में दरारें आ रही हैं, जिससे ऐतिहासिक धरोहर की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
संसद की कार्यवाही स्थगित, विपक्ष का विरोध जारी
सदन में भारी हंगामे के बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। विपक्षी सांसदों के विरोध और हंगामे के कारण सदन में कोई महत्वपूर्ण चर्चा नहीं हो पाई। अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विपक्ष और सरकार के बीच इस बजट सत्र में कितनी अहम बहसें होती हैं और क्या कोई समाधान निकलता है।
नवीनतम घटनाक्रम और सरकार की प्रतिक्रिया
इस समय संसद में जिस तरह का विरोध और हंगामा हो रहा है, उससे यह स्पष्ट होता है कि बजट सत्र में कई मुद्दों पर गंभीर बहस होने वाली है। विपक्ष जहां सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार का ध्यान संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने और बजटीय प्रक्रिया को संपन्न कराने पर केंद्रित है। यह सत्र न केवल आर्थिक मामलों, बल्कि देश की सुरक्षा, चुनावी प्रक्रिया और ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का गवाह बनेगा।
संसद के इस सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच कड़ी बहस और आलोचनाओं की संभावना जताई जा रही है। मणिपुर की स्थिति, मतदाता सूची में हेराफेरी, और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संसद में गहरी चर्चा हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किस तरह से इन मुद्दों पर विपक्ष को संतुष्ट करती है और संसद की कार्यवाही कैसे आगे बढ़ती है।
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