दिल्ली विधानसभा चुनाव में छोटे राजनीतिक दलों का बड़ा गेमप्लान, बसपा और एआईएमआईएम की टक्कर में बड़े दलों के वोट खींचने की रणनीति
दिल्ली विधानसभा चुनावों में अब कुछ महीने ही बाकी हैं, और इस बार चुनावी मैदान में बड़े दलों के अलावा छोटे दलों की सक्रियता भी तेज़ हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) जैसी सीमांत राजनीतिक पार्टियां आगामी चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अपना रणनीतिक दांव खेल रही हैं। इन दलों की योजना मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी करने की है। बसपा और एआईएमआईएम ने अपनी चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है, जिसमें मुस्लिम बहुल क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जा रहा है

बसपा की सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना
बहुजन समाज पार्टी (बसपा), जो उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत मानी जाती है, दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। पार्टी प्रमुख मायावती ने दिल्ली में बसपा की बढ़ती ताकत को लेकर विश्वास जताया है और उनकी रणनीति आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के वोटों में विभाजन की होगी। मायावती ने अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में रैलियों की भी योजना बनाई है, जिसमें वे अपने चुनावी वादों को प्रमुखता से प्रचारित करेंगी।
बसपा का मुख्य फोकस दलित, पिछड़े वर्ग और गरीब समुदायों के मुद्दों पर है, और पार्टी ने इन वर्गों को अपनी पार्टी की ओर आकर्षित करने के लिए अपनी रणनीति बनाई है। इसके अलावा, वे भ्रष्टाचार और सुशासन के मुद्दे पर भी वोटरों को लुभाने की कोशिश करेंगे।
एआईएमआईएम का मुस्लिम बहुल इलाकों पर ध्यान केंद्रित करना
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पार्टी, जो विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत मानती है, आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगभग एक दर्जन मुस्लिम बहुल सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों के माध्यम से एआईएमआईएम दिल्ली में अपनी राजनीतिक ताकत का विस्तार करने की कोशिश करेगा।
एआईएमआईएम ने अपने प्रचार का मुख्य विषय "उपेक्षित मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को प्रमुखता देना" रखा है। पार्टी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अन्य सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वोटरों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा, एआईएमआईएम ने सुशासन और न्यायिक सुधारों के वादे भी किए हैं, जिनके माध्यम से वे दिल्ली में मुस्लिम समुदाय को अपनी ओर लाने की कोशिश करेंगे।
ध्यान केंद्रित करने वाले मुद्दे: भ्रष्टाचार और सुशासन
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़े दलों के मुकाबले छोटे दलों ने भ्रष्टाचार और सुशासन जैसे मुख्य मुद्दों को अपनी चुनावी प्रचार का केंद्र बनाया है। इन दलों का आरोप है कि प्रमुख राजनीतिक दलों ने वर्षों से लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है और उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए हैं।
बसपा और एआईएमआईएम, दोनों ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भ्रष्टाचार को समाप्त करने और प्रशासन में सुधार लाने का वादा किया है। खासकर मुस्लिम-बहुल इलाकों में दोनों दलों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे उन क्षेत्रों के लिए एक मजबूत विकल्प हो सकते हैं, जहां लोगों को महसूस होता है कि उनका वोट बैंक अन्य प्रमुख दलों द्वारा उपेक्षित किया गया है।
दिल्ली में छोटे दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं
दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह देखा गया है कि पहले छोटे राजनीतिक दलों को ज्यादा तवज्जो नहीं मिलती थी, लेकिन इस बार उनकी सक्रियता काफी बढ़ी है। राष्ट्रीय राजधानी में हर वर्ग और समुदाय के मुद्दों पर बात करते हुए बसपा और एआईएमआईएम ने खुद को एक नए विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है। दोनों दलों की यह कोशिश होगी कि वे बड़े दलों के वोट को विभाजित करें और अपनी संख्या में वृद्धि करें।
इन दलों का यह भी मानना है कि दिल्ली की राजनीति में नए विकल्प की जरूरत है और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे लोगों के बीच गूंज रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बसपा और एआईएमआईएम जैसे छोटे राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीतियों में मजबूती लाते हुए मुख्य दलों को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में अपनी ताकत बढ़ाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को प्रचारित करने के साथ ही इन दलों की कोशिश होगी कि वे बड़े दलों के वोट बैंक में सेंधमारी करें। आगामी चुनाव में इन दलों की भूमिका अहम हो सकती है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि वे कितनी सफलता प्राप्त करते हैं।
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