मणिपुर: जनता दल (यूनाइटेड) ने भाजपा से समर्थन वापस लिया, जेडीयू विधायक अब विपक्ष में

मणिपुर में राजनीति एक नया मोड़ लेती हुई दिख रही है, क्योंकि जनता दल (यूनाइटेड) ने भारतीय जनता पार्टी से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया है। जेडीयू के एकमात्र विधायक, मोहम्मद अब्दुल नासिर, अब विपक्ष में जा खड़े हुए हैं। यह कदम राज्य में राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है, लेकिन फिलहाल इसे बीरेन सिंह की सरकार के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है।

Jan 22, 2025 - 18:32
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मणिपुर: जनता दल (यूनाइटेड) ने भाजपा से समर्थन वापस लिया, जेडीयू विधायक अब विपक्ष में
मणिपुर,22 जनवरी: मणिपुर में राजनीति एक नया मोड़ लेती हुई दिख रही है, क्योंकि जनता दल (यूनाइटेड) ने भारतीय जनता पार्टी से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया है। जेडीयू के एकमात्र विधायक, मोहम्मद अब्दुल नासिर, अब विपक्ष में जा खड़े हुए हैं। यह कदम राज्य में राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है, लेकिन फिलहाल इसे बीरेन सिंह की सरकार के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है।
बीरेन सिंह सरकार को खतरे की कोई आशंका नहीं
हालांकि जेडीयू के इस फैसले से मणिपुर की बीरेन सिंह सरकार को कोई तत्काल खतरा उत्पन्न नहीं हुआ है। भाजपा के पास फिलहाल 60 सदस्यीय विधानसभा में पर्याप्त बहुमत है। बीरेन सिंह सरकार ने पहले भी अपने सहयोगियों से समर्थन खोने के बावजूद सत्ता बनाए रखी है। हाल ही में, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष कॉनराड संगमा की पार्टी ने भी बीरेन सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था, लेकिन भाजपा ने अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार को स्थिर बनाए रखा।
जेडीयू की चुनावी स्थिति और भाजपा में विधायकों का पलायन
मणिपुर विधानसभा चुनाव 2022 में जनता दल (यूनाइटेड) ने राज्य की छह सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, जेडीयू के लिए यह जीत स्थिर नहीं रही, क्योंकि चुनाव के पांच महीने बाद पार्टी के पांच में से पांच विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। अब पार्टी के पास केवल एक विधायक मोहम्मद अब्दुल नासिर ही बचें हैं, जिन्होंने भाजपा से अपना समर्थन वापस लिया है और अब वे विपक्षी दल के सदस्य बन गए हैं।
भा.ज.पा. का मजबूत समर्थन आधार
वर्तमान में भाजपा के पास मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटों में से 37 विधायक हैं, जो उसे आरामदायक बहुमत प्रदान करते हैं। भाजपा को नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के पांच विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है, जिससे बीरेन सिंह की सरकार का समर्थन मजबूत दिखता है। हाल के घटनाक्रमों से यह स्पष्ट है कि भाजपा ने सत्ता में बने रहने के लिए रणनीतिक तरीके से अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन जुटाया है।
मणिपुर में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता
हालांकि बीरेन सिंह की सरकार फिलहाल बहुमत में है, मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल देखा जा सकता है। जेडीयू के समर्थन वापस लेने से यह संकेत मिलता है कि राज्य में गठबंधन राजनीति में लगातार बदलाव हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में कई पार्टीयों ने अपना समर्थन वापस लिया है, और जेडीयू का यह निर्णय भी भाजपा के लिए एक और चुनौती बन सकता है। हालांकि, भाजपा के पास बहुमत है, लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए उसे अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
मणिपुर में जनता दल (यूनाइटेड) के भाजपा से समर्थन वापस लेने के बावजूद बीरेन सिंह की सरकार के लिए कोई बड़ा संकट उत्पन्न नहीं हुआ है, क्योंकि भाजपा के पास अभी भी पर्याप्त बहुमत है। फिर भी, राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जो आने वाले समय में नए बदलावों का संकेत दे सकता है।

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Prashant Singh Journalism Student University Of Lucknow.